हाथियों की आबादी की गणना पर जून में आएगी रिपोर्ट, डीएनए प्रोफाइलिंग और कैमरा ट्रैप जैसी तकनीकों के जरिए हो रही है गिनती - Turning news

Breaking

ads a gony

Post Top Ad

->

Saturday, 17 May 2025

हाथियों की आबादी की गणना पर जून में आएगी रिपोर्ट, डीएनए प्रोफाइलिंग और कैमरा ट्रैप जैसी तकनीकों के जरिए हो रही है गिनती

नई दिल्ली: एक तरफ कोविड के चलते भले ही देश में जनगणना का काम लटक गया हो, लेकिन सरकार ने देश में हाथियों की कुल गिनती की सही-सही तस्वीर जानने का फैसला किया है। इसे लेकर देशभर में हाथियों की गिनती की कवायद अपने अंतिम मुकाम पर है। इसे लेकर आगामी हफ्ते में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले प्रोजेक्ट एलिफेंट से संबंधित विभाग की एक अहम मीटिंग कर सकता है, जिसका मकसद हाथियों की गिनती से जुड़ी रिपोर्ट के तैयार करने के लिए अहम बिंदुओं पर चर्चा करना है। हाथियों की गणना की रिपोर्ट जारी करेगा मंत्रालयसूत्रों के मुताबिक, आगामी जून महीने के आखिर में मंत्रालय हाथियों की गणना से संबंधित अपनी रिपोर्ट जारी कर सकता है। दरअसल, इसे लेकर अंतरिम रिपोर्ट तो तैयार है, जबकि नॉर्थ ईस्ट के इलाके में गणना की यह प्रक्रिया चल रही है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, गिनती को लेकर लॉजिस्टिक चुनौतियों, डीएनए प्रोफाइलिंग और कैमरा ट्रैप जैसी नई तकनीकों को लागू करने की अनिवार्यता के चलते नॉर्थ ईस्ट के डेटा कलेक्शन में देरी हुई। दरअसल, मंत्रालय के एक अहम सूत्र ने बताया कि सभी राज्यों में एक जैसी कार्यप्रणाली लागू करने के बाद ही मिले अंतिम आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। दरअसल, मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया पर करीब से निगरानी कर रहा है। वहीं वह नियमित रूप से चल रही प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा कर रहा है। इसके लिए मंत्रालय की ओर से हाथियों की निगरानी के लिए उसी फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस फ्रेमवर्क के जरिए बाघों की निगरानी की जाती है। क्यों खास रही इस बार की गिनती?उल्लेखनीय है कि हाथियों की इस बार की गिनती में खास बात यह रही कि पहली बार डीएनए प्रोफाइलिंग और कैमरा ट्रैप जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। रोचक है कि साल 2022-23 की अखिल भारतीय समन्वित हाथी गणना के अनुसार, देश में हाथियों की कुल संख्या में करीब 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हाथियों की गिनती का काम हर पांच साल में होता है, लेकिन इस बार तकनीकी कारणों और क्षेत्रीय वजहों से इसमें देरी हुई।हाथियों की आबादी में गिरावट को लेकर चिंताजनगणना की अंतरिम रिपोर्ट में एक तरफ हाथियों की आबादी में गिरावट को लेकर की चिंता दिखाई दी, तो वहीं दूसरी ओर कुछ राज्यों ने राहत भी दी। कर्नाटक ने देश में सबसे ज़्यादा हाथी दर्ज किए, जहां हाथियों की तादाद 6,395 रही, जिसमें साल 2017 की तुलना में 346 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कर्नाटक के अलावा केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भी अपनी गणना रिपोर्ट अलग से जारी की हैं। कर्नाटक के बांदीपुर, नागरहोल, बीआरटी टाइगर रिजर्व और नीलगिरि बायोस्फीयर जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हाथी पाए गए। अकेले नीलगिरि क्षेत्र में 4,126 हाथी दर्ज किए गए। दूसरी ओर, मध्य भारत, पूर्वी घाट, झारखंड और वेस्ट बंगाल (साउथ) जैसे इलाकों में हाथियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है, कुछ जगहों पर यह 41 फीसदी तक कम देखी गई। अंतरिम रिपोर्ट में हाथियों की संख्या में आई इस गिरावट के पीछे तेजी से हो रहा शहरीकरण, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, इंसानी-हाथी संघर्ष, हाथीदांत के लालच में अवैध शिकार, रेलवे हादसे और बिजली के झटके जैसी वजहें अहम मानी गई हैं।गौरतलब है कि फिलहाल भारत में 14 राज्यों में 33 हाथी रिजर्व हैं, जो कुल 80,777 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं। ये रिजर्व हाथियों के लिए सुरक्षित ठिकाने माने जाते हैं। इनका प्रबंधन राज्य वन विभाग और केंद्र सरकार द्वारा मिलकर किया जाता है।


from https://ift.tt/NIaHBtk

No comments:

Post a Comment

Pages